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RASARAJ SRI KRISHNA

  • ·  Product: रसराज श्री कृष्ण (Rasaraj Sri Krishna)

    ·  Author: His Divine Grace A.C. Bhaktivedanta Swami Srila Prabhupada

    ·  Publisher: Bhaktivedanta Book Trust (BBT) — ISKCON का official publishing arm

    ·  Sold by: ISKCON Mayapur Official Store (mayapur.store)

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रसराज श्री कृष्ण RASARAJ SRI KRISHNAभक्ति और माधुर्य का अनमोल ग्रंथ

भगवान श्री कृष्ण को "रसराज" क्यों कहा जाता है? यह प्रश्न हर उस भक्त के मन में उठता है जो कृष्ण की लीलाओं में थोड़ा भी रुचि रखता हो। रस का अर्थ केवल आनंद नहींयह वह दिव्य अनुभूति है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है। और श्री कृष्ण समस्त रसों के स्रोत हैं, उनके सर्वोच्च भण्डार हैं। इसी सत्य को सरल, सुबोध हिंदी भाषा में प्रस्तुत करती है यह अद्भुत पुस्तक"रसराज श्री कृष्ण RASARAJ SRI KRISHNA ", जो ISKCON मायापुर स्टोर पर अब आपके लिए उपलब्ध है।

यह पुस्तक परम पूजनीय श्रील .सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद की कृपा से रचित हैवही महान आचार्य जिन्होंने गौड़ीय वैष्णव दर्शन को संपूर्ण विश्व में फैलाया और भागवत-संस्कृति को घर-घर पहुँचाया। प्रभुपाद की वाणी में एक विशेष शक्ति हैवे जटिल दार्शनिक सत्यों को इस प्रकार समझाते हैं कि साधारण से साधारण व्यक्ति भी उन्हें हृदय से ग्रहण कर सके। इस पुस्तक में भी वही सरलता और गहराई एक साथ दिखती है।

भक्तिवेदान्त बुक ट्रस्ट (BBT) द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक 44 पृष्ठों की एक संक्षिप्त किंतु अत्यंत प्रभावशाली रचना है। पेपरबैक बाइंडिंग में उपलब्ध यह पुस्तक आकार में छोटी है — 17.4 cm x 12 cm — परंतु इसका आध्यात्मिक प्रभाव बहुत गहरा है। इसे थैले में रखकर कहीं भी ले जाया जा सकता है, यात्रा में पढ़ा जा सकता है, या किसी प्रियजन को उपहार में दिया जा सकता है।

इस पुस्तक में श्री कृष्ण के विभिन्न रसों का वर्णन किया गया हैशांत, दास्य, सख्य, वात्सल्य और माधुर्य। श्रील प्रभुपाद बताते हैं कि किस प्रकार भगवान कृष्ण से हमारा शाश्वत संबंध है और किस प्रकार हम उस संबंध को पुनः जाग्रत कर सकते हैं। संसार में हम जितने भी रसों का अनुभव करते हैंप्रेम, मित्रता, वात्सल्य, सेवाये सब उस परम रस की विकृत छायाएँ मात्र हैं। वास्तविक रस केवल कृष्ण के साथ अपने स्वाभाविक संबंध में ही मिल सकता है। यही इस पुस्तक का मूल संदेश है।

हिंदी भाषा के पाठकों के लिए यह पुस्तक एक विशेष उपहार है। जो भक्त अंग्रेजी ग्रंथों को सहज नहीं पाते या जो नव-दीक्षित भक्त हैं और भक्ति के मूल तत्त्वों को समझना चाहते हैं, उनके लिए "रसराज श्री कृष्ण" एक आदर्श आरंभिक पुस्तक है। विद्यालयों, मंदिरों, और भक्त-समाजों में इसे वितरित करना भी अत्यंत फलदायी है।

मात्र ₹20 की मूल्य पर यह पुस्तक किसी भी बजट में आसानी से आती है। यह कीमत इस

9789382716518
Author
HIS DIVINE GRACE A.C. BHAKTIVEDANTA SWAMI PRABHUPADA
Language
HINDI
Pages
44
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