GITA SAAR
Gita Saar
- श्रील ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के मार्गदर्शन में BBT द्वारा प्रकाशित
- केवल 64 पृष्ठों में भगवद्गीता का संपूर्ण सार
- सरल, शुद्ध और प्रवाहमय हिंदी भाषा में लिखी गई
- यात्रा, मंदिर या घर की पूजा के समय आसानी से पढ़ने योग्य
- मात्र ₹25 में उपलब्ध — एक अमूल्य आत्मिक निवेश
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गीता सार GITA SAAR — भगवद्गीता का सरल और सारगर्भित सार
भगवद्गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, यह जीवन जीने की कला है। लेकिन आज के व्यस्त जीवन में इसके अठारह अध्यायों का गहन अध्ययन हर किसी के लिए संभव नहीं हो पाता। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भक्तिवेदांत बुक ट्रस्ट (BBT) ने प्रस्तुत किया है — गीता सार GITA SAAR, जो श्रीमद् भगवद्गीता के समस्त शाश्वत उपदेशों का सरल, संक्षिप्त और प्रामाणिक हिंदी संस्करण है।
यह छोटी-सी पुस्तक श्रील ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की कृपा और मार्गदर्शन में BBT द्वारा प्रकाशित की गई है। केवल 64 पृष्ठों में यह पुस्तक उन सभी आत्मिक सत्यों को समेट लेती है जो श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को सुनाए थे।
क्या मिलेगा इस पुस्तक में?
गीता सार GITA SAARमें भगवद्गीता के मूल विषयों को अत्यंत स्पष्ट और सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया है:
- आत्मा का स्वरूप — जीवात्मा और परमात्मा का संबंध
- कर्मयोग — निःस्वार्थ कर्म करने की कला
- भक्तियोग — श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और शरणागति का मार्ग
- ज्ञानयोग — आत्मज्ञान और विवेक का विकास
- धर्म और कर्तव्य — जीवन में सही दिशा चुनने की समझ
- भय और संघर्ष से मुक्ति — मन की शांति और स्थिरता का रहस्य
यह पुस्तक किन के लिए है?
- जो लोग भगवद्गीता को पहली बार पढ़ना चाहते हैं और सरल भाषा में इसे समझना चाहते हैं
- जो भक्तजन गीता के उपदेशों को दैनिक जीवन में उतारना चाहते हैं
- हिंदी भाषी पाठक जो आत्मिक मार्गदर्शन की तलाश में हैं
- मंदिर पुस्तकालय, अध्ययन समूह और व्यक्तिगत साधना के लिए
क्यों खरीदें ISKCON Mayapur Store से?
ISKCON Mayapur के आधिकारिक स्टोर से खरीदने पर आपको मिलता है BBT का प्रामाणिक संस्करण, जिसमें अनुवाद की शुद्धता और परंपरा के प्रति निष्ठा पूर्णतः बनाए रखी गई है। मात्र ₹25 की कीमत पर यह पुस्तक एक अमूल्य आत्मिक निवेश है।
यात्रा के दौरान, मंदिर में या घर की पूजा के समय — गीता सार GITA SAAR हमेशा आपके साथ रह सकती है। इसे अपने संग्रह में जोड़ें और श्रीकृष्ण के दिव्य वचनों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
- Author
- HIS DIVINE GRACE A.C. BHAKTIVEDANTA SWAMI PRABHUPADA
- Language
- HINDI
- Pages
- 64

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