HARINAM JAPA KI MAHIMA
Harinam Japa ki Mahima
· श्रील प्रभुपाद रचित — जप के विज्ञान पर प्रामाणिक हिंदी ग्रंथ
· नाम-अपराध, नामाभास और शुद्ध नाम का सरल और स्पष्ट विवेचन
· हरे कृष्ण महामंत्र की आंतरिक शक्ति और संरचना का विश्लेषण
· सोलह माला नित्य जप का महत्त्व और एकाग्रता बढ़ाने के उपाय
· 128 पृष्ठ, पेपरबैक, ISBN: 9789383095582
· आकार: 17.8 × 12 × 0.5 cm | वजन: 88 ग्राम
· नए भक्तों से उन्नत साधकों तक — सभी के लिए समान रूप से उपयोगी
· BBT प्रकाशित | ISKCON मायापुर स्टोर से मात्र ₹45 में उपलब्ध
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हरिनाम जप की महिमा — एक माला, अनंत फल
सुबह के उस शांत पहर में जब दुनिया अभी जागी नहीं होती, एक भक्त अपनी तुलसी की माला उठाता है और धीरे-धीरे जप शुरू करता है — हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे। यह केवल शब्दों का दोहराव नहीं है। यह आत्मा का अपने मूल स्रोत से संवाद है। लेकिन क्या हम वाकई समझते हैं कि इस जप की शक्ति कितनी गहरी है? इसी प्रश्न का उत्तर देती है — HARINAM JAPA KI MAHIMA।
श्रील ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद द्वारा रचित यह हिंदी पुस्तक जप के विज्ञान को उसकी जड़ तक समझाती है। यह केवल एक धार्मिक पुस्तिका नहीं है — यह उस भक्त के लिए एक ज़रूरी मार्गदर्शिका है जो अपने जप को यांत्रिक अभ्यास से उठाकर सच्ची भावना की ओर ले जाना चाहता है।
हरिनाम और इस कलियुग का संबंध
शास्त्रों में बार-बार कहा गया है — कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिरन्यथा। यानी इस कलियुग में हरिनाम संकीर्तन के अलावा कोई दूसरा मार्ग नहीं है। पर यह नाम इतना प्रभावशाली क्यों है? इसके उच्चारण से क्या होता है? मन भटकता है तो क्या करें? अपराध से बचें कैसे? ये सारे व्यावहारिक प्रश्न इस पुस्तक में श्रील प्रभुपाद ने अपनी सरल और सीधी शैली में समझाए हैं।
पुस्तक की विशेषताएँ:
- नामाभास, नाम-अपराध और शुद्ध नाम — तीनों अवस्थाओं की स्पष्ट व्याख्या
- जप में एकाग्रता कैसे लाएँ — व्यावहारिक सुझाव श्रील प्रभुपाद के शब्दों में
- हरे कृष्ण महामंत्र की आध्यात्मिक संरचना और उसके अर्थ का विश्लेषण
- नित्य सोलह माला जप का महत्त्व और इसे जीवन में उतारने की विधि
- भक्ति के प्रारंभिक स्तर से लेकर उन्नत साधकों तक — सभी के लिए उपयोगी
यह पुस्तक आपके लिए क्यों ज़रूरी है
बहुत से लोग वर्षों से जप करते हैं, पर भीतर वही खालीपन बना रहता है। इसका कारण यह नहीं कि नाम में शक्ति नहीं — कारण यह है कि हम नाम को उसके असली स्वरूप में नहीं जानते। Harinam Japa ki Mahima वही समझ देती है जो हर जप करने वाले को होनी चाहिए।
भक्तिवेदांत बुक ट्रस्ट (BBT) द्वारा प्रकाशित यह 128 पृष्ठों की पेपरबैक पुस्तक ISKCON मायापुर की आधिकारिक स्टोर से मात्र ₹45 में उपलब्ध है। घर बैठे मँगवाएँ और अपने जप को एक नई गहराई दें।
माला हाथ में है — अब बस समझ भी हो जाए।
हरे कृष्ण।
Title : HARINAM JAPA KI MAHIMA
Language : HINDI
Author : HIS DIVINE GRACE A.C. BHAKTIVEDANTA SWAMI PRABHUPADA
Binding : PAPERBACK
ISBN: 9789383095582
Publisher : THE BHAKTIVEDANTA BOOK TRUST
Edition : FIRST
Pages : 128
Product Dimensions : 17.8 cm x 12 cm x 0.5 cm
Product Weight : 0.088 kg
- Author
- HIS DIVINE GRACE A.C. BHAKTIVEDANTA SWAMI PRABHUPADA
- Language
- HINDI
- Pages
- 128

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